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- Description
Bharatiya Gyan-Parampara Ka Nairantarya-Kapil Kapoor
About the Products:
आचार्यवर एक बात बड़ी केंद्रीयता से स्थापित करना चाहते है कि भारत वैभवशाली, शक्ति-संपन्न देश रहा है। आपसी अंतर्विरोधों एवं षड्यंत्रों ने हमें गुलामी की ओर धकेला है। पर हम शरीर से भले गुलाम रहे हों, मन-मस्तिष्क से कभी गुलाम नहीं रहे, इसलिए जिस जेएनयू में 1970 के दशक में जब मार्क्सवाद अपने चरम पर था, भारतीय विचारों को दकियानूसी एवं ओल्ड कहा जा रहा था, उसी जेएनयू में आचार्यवर ने अंग्रेजी साहित्य में पाणिनि, पतंजलि और भर्तृहरि के माध्यम से भारतीय व्याकरण परंपरा को पढ़ाने का सुदृढ़ निर्णय लिया। आज भी वह चल रहा है। आज जेएनयू में संस्कृत एवं प्राच्य विद्या अध्ययन संस्थान एवं वर्तमान में भारतीय ज्ञान-परंपरा का केंद्र खुलना इस तथ्य को प्रमाणित करता है कि ज्ञानात्मक संस्कृति का पाञ्चजन्य क्या है। महाभारत के युद्ध में पाञ्चजन्य शंख श्रीकृष्ण ने बजाया था। 70 के दशक में वही पाञ्चजन्य जेएनयू से गूंज बनकर आज संपूर्ण भारत में भारतीय ज्ञान-परंपरा के माध्यम से ग्रहण किया जा रहा है तो उसमें लगभग 51 (1974 से 2025) वर्षों की अनवरत साधना का प्रतिफल ही है। भारत के कोने-कोने में दिए गए उनके व्याख्यान, संवाद और अनंत मानस परिवर्तन ने भारतीय ज्ञान-परंपरा को ज्ञानात्मक संस्कृति का पाञ्चजन्य बना दिया है।
Language: Hindi
Page No: 136
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